Wednesday, July 2

तेरह से उन्नीस वर्ष तक की अवस्था वालों की बातचीत

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कैसा लटक रहा है?
बस यार, जीवन चूस रहा है।
क्यों यार, क्या हुआ?
चल छोड़, चलचित्र देखने चलते हैं।
कौनसी?
दोष रहित मन्न की अनंत धूप ।
यार यह भी कोई चलचित्र है। मैं पहले से ही दबा हुआ हूँ।
चल लोहे के आदमी के लिए चलते हैं।
नही दोस्त, मुझे अतिक्रम वाले चलचित्र पसंद नही।
हम कभी बीच में मिल ही नही सकते।
क्या करें, सब कुछ चूस रहा है।
चल, कुछ धातु संगीत सुनकर मस्तक मारते हैं।
यह उचित है। दुनिया को मैथुन करो।
Courtesy: Word Anywhere

2 comments:

  1. This one made me slighty sad. I think I've kind of forgotten to read hindi.

    :(

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  2. This one made me slighty sad. I think I've kind of forgotten to read hindi.

    :(

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